क्रिकेट मेरी नजर से
जब बात क्रिकेट और क्रिकेट फैंस की हो तो भारत का नाम सबसे पहले लिया जाता है, जहाँ क्रिकेट धर्म की तरह पूजा जाता है यहाँ करोड़ों क्रिकेट फैंस प्लेयर्स को भगवान का दर्जा देते है
पर क्या आप लोगों ने पिछले कुछ दिनो में क्रिकेट को बदलते हुए महसूस किया है जी हा क्रिकेट अब बदल रहा है या यू कहे की बदल चुका है तो गलत नही होगा
अब आप ये सोच रहे होंगे के वक्त के साथ तो हर चीज बदल जाती है इसमे कौन सी नयी बात है, पर अगर पहले की क्रिकेट से आज की क्रिकेट की तुलना की जाये और कुछ बारीकियां पर धयान दें तो आप पायेंगे इस बदलते खेल में उदासीनता आ रही है और रोमांच कम होता जा रहा है, यही कारण है जिसके चलते
20- 20 फ़ार्मेट की शुरुआत करनी पड़ी, लोगों के पास समय कम है लोग जल्दी मैच का परिणाम देखना चाहते हैं ये सब फालतू की बातें हैं बकवास हैं मै इससे सहमत नही हूँ, कोई भी क्रिकेट प्रेमी कभी नही चाहेगा की क्रिकेट जल्दी से ख़त्म हो और वो घर जाये क्रिकेट प्रेमी को चहिये रोमांच वो तो रोमांचक खेल देखने की उम्मीद से आया है और क्रिकेट के ठेकदारों ने इस खेल को काट छाँट कर इसे उदासीन बना दिया है जिसका परिणाम ये हुआ कि 434 का रिकॉर्ड स्कोर बनता है और अगले 3 घंटों में वो चेज कर लिया जाता है और एक 2003 वर्ल्ड कप फाइनल का दिन था जब ऑस्ट्रेलिया ने इंडिया को 360 का लक्ष्य दिया तो आधे देश ने पहले ही हार मान लिया था वो दिन कँहा गये दोस्तों क्या कोई क्रिकेट के उस रोमांच को वापस ला सकता है जब करोड़ों क्रिकेट प्रेमी सचिन सेहवाग की ओपनिंग देखने को बेकरार रहते थे कहा जाता है क्रिकेट अनिश्चित्ताओ का खेल है पर आज के क्रिकेट में कुछ चीज़े निश्चित होती जा रही हैं मै बीसीसीआई से अपील करता हूं अगर बदलाव ही करना है कुछ ऐसा करें जिससे क्रिकेट में रोमांच कम ना हो और रोज नये नये नियम बनाकर नये फॉर्मेट को ला कर इस खेल के रोमांच को ना मारें..
सौरभ कुमार सोनी।
पर क्या आप लोगों ने पिछले कुछ दिनो में क्रिकेट को बदलते हुए महसूस किया है जी हा क्रिकेट अब बदल रहा है या यू कहे की बदल चुका है तो गलत नही होगा
अब आप ये सोच रहे होंगे के वक्त के साथ तो हर चीज बदल जाती है इसमे कौन सी नयी बात है, पर अगर पहले की क्रिकेट से आज की क्रिकेट की तुलना की जाये और कुछ बारीकियां पर धयान दें तो आप पायेंगे इस बदलते खेल में उदासीनता आ रही है और रोमांच कम होता जा रहा है, यही कारण है जिसके चलते
20- 20 फ़ार्मेट की शुरुआत करनी पड़ी, लोगों के पास समय कम है लोग जल्दी मैच का परिणाम देखना चाहते हैं ये सब फालतू की बातें हैं बकवास हैं मै इससे सहमत नही हूँ, कोई भी क्रिकेट प्रेमी कभी नही चाहेगा की क्रिकेट जल्दी से ख़त्म हो और वो घर जाये क्रिकेट प्रेमी को चहिये रोमांच वो तो रोमांचक खेल देखने की उम्मीद से आया है और क्रिकेट के ठेकदारों ने इस खेल को काट छाँट कर इसे उदासीन बना दिया है जिसका परिणाम ये हुआ कि 434 का रिकॉर्ड स्कोर बनता है और अगले 3 घंटों में वो चेज कर लिया जाता है और एक 2003 वर्ल्ड कप फाइनल का दिन था जब ऑस्ट्रेलिया ने इंडिया को 360 का लक्ष्य दिया तो आधे देश ने पहले ही हार मान लिया था वो दिन कँहा गये दोस्तों क्या कोई क्रिकेट के उस रोमांच को वापस ला सकता है जब करोड़ों क्रिकेट प्रेमी सचिन सेहवाग की ओपनिंग देखने को बेकरार रहते थे कहा जाता है क्रिकेट अनिश्चित्ताओ का खेल है पर आज के क्रिकेट में कुछ चीज़े निश्चित होती जा रही हैं मै बीसीसीआई से अपील करता हूं अगर बदलाव ही करना है कुछ ऐसा करें जिससे क्रिकेट में रोमांच कम ना हो और रोज नये नये नियम बनाकर नये फॉर्मेट को ला कर इस खेल के रोमांच को ना मारें..
सौरभ कुमार सोनी।

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